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अलवर जिला दर्शन | अलवर जिला Rajasthan GK in Hindi | Alwar District GK in Hindi

आज की इस पोस्ट में राजस्थान सामान्य ज्ञान के अलवर जिला दर्शन को अच्छी तरह से बताया गया है। इसमें Alwar District GK in Hindi, Alwar Zila Darshan, Alwar GK in Hindi, अलवर जिले का सामान्य परिचय, अलवर जिले के उपनाम, अलवर जिले का अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार, अलवर जिले का क्षेत्रफल, अलवर जिले के प्रमुख मेले और त्यौहार, अलवर जिले के प्रमुख मंदिर, अलवर शैली, अलवर जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, अलवर जिले के पर्यटन स्थल, अलवर जिले की खनिज संपदा, अलवर जिले के अभ्यारण्य, अलवर जिले के किले/दुर्ग एवं अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न को शामिल किया गया है। 
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Alwar District GK in Hindi

    अलवर जिले का सामान्य परिचय -

    'पूर्वी राजस्थान का कश्मीर' नाम से प्रसिद्ध अलवर की स्थापना कछवाहा वंश के रावराजा प्रताप सिंह ने की थी। इसकी राजधानी विराटनगर थी। विराट नगर के राजा के यहां पांडवों ने अपना अज्ञातवास बिताया था। इस क्षेत्र को राजस्थान के प्राचीनतम क्षेत्रों में गिना जाता है। महाभारत काल में इसे मत्स्य क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। स्वतंत्रता के पश्चात 18 मार्च 1948 को (एकीकरण का प्रथम चरण) अलवर, भरतपुर, धौलपुर तथा करौली को मिलाकर मत्स्य संघ की स्थापना की गई तथा बाद में 15 मई 1949 को मत्स्य संघ एवं वृहत राजस्थान (चतुर्थ चरण) को मिलाकर संयुक्त वृहत राजस्थान का निर्माण किया गया। वर्तमान में अलवर जिला जयपुर संभाग के अंतर्गत आता है। अलवर जिले से होकर रूपारेल एवं साबी नदियां बहती है। 
    अलवर के महत्वपूर्ण तथ्य:-
    • अलवर जिले की अक्षांशीय स्थिति : 27 डिग्री 4 मिनट उत्तरी अक्षांश से 28 डिग्री 4 मिनट उत्तरी अक्षांश तक।
    • अलवर जिले की देशांतरीय स्थिति : 76 डिग्री 7 मिनट पूर्वी देशांतर से 77 डिग्री 13 मिनट पूर्वी देशांतर तक।
    • अलवर जिले का क्षेत्रफल : 8380 वर्ग किलोमीटर।
    • अलवर जिले की सीमा पर स्थित पड़ोसी जिले - भरतपुर, दौसा, जयपुर व सीकर जिले।
    • अलवर जिले के प्रमुख उपनाम - राजस्थान का स्कॉटलैंड, राजस्थान का सिंह द्वार, पूर्वी राजस्थान का कश्मीर, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, साल्व प्रदेश।
    • अलवर जिले की कुल तहसील - अलवर जिले की कुल 16 तहसील हैं जिनके नाम निम्न है - अलवर, थानागाजी, किशनगढ़ बास, तिजारा, गोविंदगढ़, कठूमर, बानसूर, रैणी, मालाखेड़ा, कोटकासिम , लक्ष्मणगढ़, राजगढ़, मुंडावर, बहरोड, नीमराना, रामगढ़।
    • अलवर जिले के विधानसभा क्षेत्र - अलवर जिले के कुल 11 विधानसभा क्षेत्र - तिजारा, किशनगढ़ बास, अलवर शहर, रामगढ़, थाना गाजी, राजगढ़, लक्ष्मणगढ़, मुंडावर, बानसूर, कठूमर, बहरोड, अलवर ग्रामीण।
    • अलवर जिले की कुल जनसंख्या : 36,74,179 (वर्ष 2011 की जनगणना)
    • अलवर जिले में जनसंख्या घनत्व : 438 प्रति वर्ग किलोमीटर (वर्ष 2011 की जनगणना)
    • अलवर में लिंगानुपात : 895 (वर्ष 2011 की जनगणना)

    अलवर के प्रमुख मेले और त्यौहार -

    • बिलारी माता का मेला : यह मेला अलवर के बिलारी स्थान पर चैत्र शुक्ला 7-8 को भरता है।
    • भृर्तहरि का मेला - भृर्तहरि का मेला अलवर जिले के भृर्तहरि (महान योगी भृर्तहरि की तपोभूमि) में भाद्रपद शुक्ला 8 को भरता है।
    • चंद्रप्रभु मेला - यह मेला तिजारा (अलवर) में फाल्गुन शुक्ला सप्तमी एवं श्रावण शुक्ला दशमी को भरता है।

    बाबा मोहन राम का थान -

    • बाबा मोहन राम का यह थान अलवर के भिवाड़ी के मलिकपुर गांव में पहाड़ी पर स्थित है।
    • यह लोक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। 

    नौगांवा के जैन मंदिर -

    • अलवर जिले में अलवर-दिल्ली मार्ग पर स्थित नौगांवा कस्बा समूचे उत्तरी भारत में दिगंबर जैन समाज का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
    • यहां के जैन मंदिरों में तीर्थंकर श्री मल्लिनाथ जी का 9 चौकिया मंदिर बहुत ही प्राचीन है, इसका निर्माण संवत 803 में करवाया गया था।
    • इस जैन मंदिर में विराजमान मल्लीनाथ की प्रतिमा की एक खास विशेषता है, कि इस पर आगे के निचले हिस्से पर कुछ अंकित होने की बजाय इसकी पीठ पर प्रशस्ति अंकित है।
    • जैन तीर्थकर शांतिनाथ भगवान का विशाल मंदिर जिसे ऊपर वाला मंदिर के नाम से भी जाना जाता है यहीं पर स्थित है।

    नारायणी माता का मंदिर -

    • नारायणी माता का यह मंदिर अलवर जिले के राजगढ़ तहसील में बरवा डूंगरी की पहाड़ी की तलहटी ने स्थित है।
    • यह मंदिर सघन वृक्षों से घिरा हुआ है तथा यह सभी संप्रदायों एवं वर्गों का आराध्य स्थल है।
    • इस मंदिर में प्रतिवर्ष वैशाख शुक्ला एकादशी को नारायणी माता का एक विशाल मेला भरता है।

    तिजारा जैन मंदिर, तिजारा -

    • अलवर के तिजारा में स्थित आठवें जैन तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु का एक विशाल मंदिर है।
    • इस मंदिर में देहरा नामक स्थान पर चंद्रप्रभु भगवान की मूर्ति प्राप्त हुई थी।
    • यहां पर प्रति वर्ष फाल्गुन शुक्ला सप्तमी व श्रावण शुक्ला दशमी को एक विशाल मेला लगता है।

    नौगजा जैन मंदिर -

    • अलवर के नौगजा नामक स्थान पर विशाल जैन मंदिरों के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
    • इनमें भगवान पार्श्वनाथ की 27 फीट ऊंची प्रतिमा भी है।
    • यह स्थान अलवर शहर से 60 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।

    रावण पार्श्वनाथ मंदिर -

    • यह मंदिर अलवर शहर में स्थित है।
    • यह एक प्रसिद्ध जैन मंदिर है।

    विजय मंदिर पैलेस -

    • अलवर जिले में विजय सागर बांध के तट पर महाराजा जयसिंह द्वारा 1918 में निर्मित विजय मंदिर पैलेस पर्यटन की दृष्टि से खास महत्व रखता है।
    • यहां पर सीताराम का भव्य मंदिर भी स्थित है।
    • इस भव्य महल और ऊंची मीनार का प्रतिबिंब झील के पानी में झिलमिलाता हुआ प्रतीत होता है, तो उस समय वहां का दृश्य बहुत ही मनोहारी दिखाई देता है।
    • झील के निकट बने इस मनोहरी भवन की दीवारें धार्मिक एवं पौराणिक संदर्भों पर आधारित भित्ति चित्रों से अलंकृत है।

    ईटाराणा की कोठी -

    • इसका निर्माण अलवर के महाराजा जयसिंह ने करवाया था।
    • यह उत्कृष्ट जाली झरोकों व तोरणनुमा टोडे से युक्त है।
    • यह मनोहारी एवं मेहराबदार छतरियां वाले भवन है।

    मूसी महारानी की छतरी -

    • अलवर जिले में अलवर राजप्रासाद के पीछे सागर तालाब के किनारे लाल पत्थर एवं सफेद संगमरमर से महाराजा बख्तावर सिंह और मूसी महारानी की की स्मृति में बनी दो मंजिली इस छतरी का निर्माण अलवर के महाराजा विनय सिंह ने करवाया था।
    • यह छतरी सफेद संगमरमर के 80 कलात्मक खंभों पर टिकी हुई है।

    फतेहगंज का मकबरा -

    • यह पांच मंजिला मकबरा मुगल काल की इमारत है।
    • यह अलवर शहर में स्थित है, इसका निर्माण 1547 ईस्वी में फतेहगंज की मृत्यु होने के बाद उनकी स्मृति में करवाया गया था। 

    पुर्जनविहार, अलवर -

    • इसको कंपनी गार्डन भी कहा जाता है।
    • इसका निर्माण महाराजा मंगल सिंह द्वारा करवाया गया था।
    • इसके बीच में स्थित समर हाउस को शिमला कहा जाता है, इसका निर्माण 1868 ईस्वी में अलवर महाराजा शिवदान सिंह ने एवं समर हाउस का निर्माण 1835 ईस्वी में महाराजा मंगल सिंह जी ने करवाया था।

    पांडुपोल, अलवर -

    • ऐसा माना जाता है कि जब पांडवों को उनके अज्ञातवास के दौरान कौरवों की सेना ने घेरा था तब भीम ने पहाड़ में गदा मारकर रास्ता निकाला था, जिससे पांडुपोल कहा जाता है। उसके बाद से ही इस स्थान को पांडुपोल के नाम से प्रसिद्ध माना जाता है।
    • यह एक प्राकृतिक पर्यटन स्थल है, इस स्थान पर स्थित मंदिर में हनुमान जी की शयन मुद्रा में प्रतिमा विराजमान है।
    • यहां पर भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी एवं पंचमी को हनुमान जी का विशाल मेला लगता है।

    होप सर्कस (कैलाश बुर्ज) -

    • इसका निर्माण 1939-40 ईसवी में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो के अलवर आगमन पर उसकी पुत्री मिस हॉप के नाम पर करवाया गया था।
    • हॉप सर्कस को  कैलाश बुर्ज के नाम से भी जाना जाता है।

    सिलीसेढ़ झील, अलवर -

    • अलवर सिलीसेढ़ झील का निर्माण महाराजा विनय सिंह ने 1845 ईसवी में अपनी रानी शीला के लिए करवाया था।
    • सिलीसेढ़ झील को राजस्थान का नंदनकानन भी कहा जाता है।
    • यह झील अलवर जिले की सबसे प्रसिद्ध और सुंदर झील है।
    • वर्तमान में सिलीसेढ़ को होटल लेक पैलेस में तब्दील कर दिया गया।
    • सिलीसेढ़ झील दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-8 पर स्थित है।

    सरिस्का वन्य जीव अभ्यारण्य, अलवर -

    • यह अभ्यारण्य अलवर जिले में स्थित है।
    • यह राज्य का सबसे छोटा अभयारण्य है।
    • राजस्थान की दूसरी बाघ परियोजना 1978 ईस्वी में यहां शुरू की गई।
    • यहां पर सर्वाधिक लंगूर, हरे कबूतर, बंदर पाए जाते हैं।
    • यहां मयूरों का घनत्व सर्वाधिक है।
    • इस अभयारण्य में नीलकंठ महादेव, पांडुपोल हनुमान जी, ताल वृक्ष,  भृर्तहरि,  राजोरगढ़ नामक स्थान पर शिव एवं नौगजा आदि दर्शनीय स्थल है।
    • स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने राजस्थान के सरिस्का में कैबिनेट मीटिंग ली थी।

    अलवर जिले के खनिज -

    • खो दरीबा, राजगढ़ व बादामपुर से संगमरमर प्राप्त होता है।
    • राजगढ़ एवं पुरवा से लौह अयस्क प्राप्त होता है।
    • झकराना, नीमराना - सिलेटी पत्थर के लिए प्रसिद्ध है।
    • खो दरीबा तांबे के लिए प्रसिद्ध है।

    अलवर जिले के प्रमुख संप्रदाय -

    • चरणदासी संप्रदाय - चरणदासी संप्रदाय के संस्थापक चरणदास जी थे। इस संप्रदाय के कुल 42 नियम है। चरणदासी संप्रदाय की प्रधान पीठ दिल्ली में है। चरणदास जी ने भारत पर नादिरशाह के आक्रमण की भविष्यवाणी की थी। चरण दास जी की शिष्या दया बाई ने दया बोध व विनयमलिका  का नामक ग्रंथों की रचना की थी।
    • लालदासी संप्रदाय - लालदासी संप्रदाय के संस्थापक लालदास जी थे। लालदासी संप्रदाय की प्रधान पीठ नगला (भरतपुर) में है। लालदास जी का समाधि स्थल शेरपुर (अलवर जिले) में स्थित है।

    अलवर दुर्ग (बाला किला) -

    • अलवर दुर्ग के उपनाम - बड़ा किला, अलवर का किला, बावनगढ़ का लाडला, कुंवारा किला (इस किले पर कभी युद्ध नहीं हुआ)
    • अलवर दुर्ग का निर्माण कोकिल देव के पुत्र अलघुराय ने करवाया था।
    • इस दुर्ग का पुनर्निर्माण हसन खा मेवाती ने करवाया था।
    • यह दुर्ग एक पर्वत शिखर पर स्थित है, जिसके नीचे एक अलपुर नामक नगर बसाया गया।
    • इस दुर्ग में बाबर एक रात रुका था तथा अकबर ने अपने पुत्र जहांगीर को यहां नजर बंद करवाया था।
    • हसन खान मेवाती ने खानवा के युद्ध में सांगा की ओर से बाबर के खिलाफ लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की थी।
    • बाबर ने इस दुर्ग पर अधिकार कर इसे अपने पुत्र हिन्दाल को जागीर में दे दिया था।
    • शेरशाह सूरी के उत्तराधिकारी सलीम शाह के काल में यहां सलीम सागर जलाशय बनवाया था।
    • भरतपुर नरेश सूरजमल ने औरंगजेब की मृत्यु के बाद इस दुर्ग पर अधिकार कर लिया था तथा उसमें महल एवं एक कुंड सूरजकुंड बनवाया था।
    • 1775 ईस्वी में माचेड़ी के शासक व कछवाहा वंश  की नरुका शाखा के राव प्रताप सिंह ने अधिकार कर इसको जयपुर से स्वतंत्र कराकर अलवर रियासत की डाली थी।
    • अलवर दुर्ग की प्राचीर लगभग 6 मील लंबी है, इस दुर्ग की प्राचीर में शत्रुओं पर गोले बरसाने के लिए छेद किए हुए हैं।
    • अलवर के किले के 6 प्रवेश द्वार है - चांदपोल, सूरजपोल, जयपोल, किशनपोल, अंधेरी गेट एवं लक्ष्मणपुर।

    कांकनवाड़ी का किला, अलवर -

    • यह प्रसिद्ध दुर्ग सरिस्का वन्य जीव अभ्यारण्य के घने जंगल में स्थित है।
    • ऐसा माना जाता है कि इस अभेद्य दुर्ग का निर्माण जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वारा करवाया गया था।
    • यह दुर्ग गिरी दुर्ग तथा वन दुर्ग दोनों प्रकार के दुर्गो की श्रेणी में आता है।
    • इस दुर्ग में औरंगजेब ने अपने भाई दाराशिकोह को कैद करके रखा था।
    • दुर्ग की ऊपरी मंजिल पर भित्ति चित्रों से अलंकृत बारहदरी बनी हुई है।

    भानगढ़ दुर्ग, अलवर -

    • इसको खंडहरों का नगरभूतहा किला के नाम से भी जाना जाता है।
    • यह दुर्ग सांवण नदी के तट पर सरिस्का अभयारण्य में राजगढ़ तहसील में स्थित है।
    • इस दुर्ग का निर्माण आमेर के राजा भगवंत दास ने 1573 ईस्वी में करवाया था।
    • वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा संरक्षित है।

    राजोरगढ (नीलकंठ दुर्ग) -

    • यह दुर्ग अलवर जिले के टहला कस्बे के पास अरावली पर्वतमाला की एक पहाड़ी पर स्थित है।
    • 12 वीं शताब्दी में यहां बडगूजर शासकों का अधिकार रहा था।
    • बडगूजर शासक मंथनदेव ने यहां पर भव्य नीलकंठ महादेव मंदिर बनवाया था। इसके पश्चात से ही यह नगर नीलकंठ राजोरगढ़ के नाम से प्रसिद्ध हो गया था। यह मंदिर जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ की भव्य प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है, इसे लोग नौगजा मंदिर कहते हैं, इस कस्बे को पारा नगर भी कहते हैं।

    नीमराना दुर्ग, अलवर -

    • पंचमहल के नाम से विख्यात इस किले का निर्माण 1464 ईस्वी में चौहान शासकों द्वारा करवाया गया था।

    अलवर चित्र शैली -

    • इस शैली का स्वर्णकाल विनय सिंह के शासनकाल को माना जाता है।
    • यह शैली मुगल शैली तथा जयपुर शैली का सम्मिश्रण माना जाता है।
    • यह शैली गणिकाओ/वेश्याओं के चित्र एवं बसलो चित्रण (बॉर्डर पर चित्रण) के लिए प्रसिद्ध है।
    • इस शैली पर ईस्ट इंडिया कंपनी का सर्वाधिक प्रभाव पड़ा था, इसलिए इसमें वन, उपवन, कुंजविहार, अश्लील नृत्यांगना, वेश्याओं के चित्र मिलते हैं।
    • जमुनादास, छोटेलाल, बक्सा राम, शालिग्रा,म नंदराम चित्रकार राजस्थान के अलवर शैली से संबंधित है।

    अलवर के अन्य प्रश्न -

    • भारत का प्रथम जल विश्वविद्यालय अलवर में है।
    • राजस्थान की प्रथम प्याज मंडी अलवर जिले में है।
    • भारत का पहला राष्ट्रीय स्तर का खेल गांव जरौली, तिजारा (अलवर) में है।
    • देश का प्रथम मॉडल जिला अलवर है।
    • भारत का पहला इंटीग्रेटेड ट्रेफिक मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट अलवर जिले में खुलेगा।
    • राजस्थान के चंदौली (अलवर) स्थान पर भारत के प्रथम 'माइनॉरिटी साइबर विलेज' का उद्घाटन किया गया।
    • करेंसी नोटों की स्याही बनाने का कारखाना भिवाड़ी (अलवर) में है।
    • देश का प्रथम राष्ट्रीय उत्पादन एवं निवेश केंद्र अलवर जिले में है।
    • राजस्थान का पहला जिला जिसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल किया गया अलवर जिला है।
    • शहरी जनसंख्या में सर्वाधिक दशक की वृद्धि अलवर जिले में देखने को मिली है।
    • राजस्थान का एकमात्र शुकर प्रजनन केंद्र अलवर जिले में है।
    • कनिंघम ने शाल्वपुर की अलवर नगर के रूप में पहचान की थी।
    • सर्वाधिक 16 तहसील अलवर जिले में है।
    • मुर्रा नस्ल की सर्वाधिक भैंसे अलवर जिले में पाई जाती है।
    • सबसे छोटा अभयारण्य सरिस्का वन्य जीव अभ्यारण अलवर जिले में है।
    यह भी पढ़ें:-
    आज की इस पोस्ट में राजस्थान सामान्य ज्ञान के अलवर जिला दर्शन को अच्छी तरह से बताया गया है। इसमें अलवर जिले का सामान्य परिचय, अलवर जिले के उपनाम, अलवर जिले का अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार, अलवर जिले का क्षेत्रफल, अलवर जिले के प्रमुख मेले और त्यौहार, अलवर जिले के प्रमुख मंदिर, अलवर शैली, अलवर जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल, अलवर जिले के पर्यटन स्थल, अलवर जिले की खनिज संपदा, अलवर जिले के अभ्यारण्य, अलवर जिले के किले/दुर्ग एवं अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न को शामिल किया गया है। आप सभी को यह पोस्ट कैसी लगी। आप सभी कमेंट करके जरूर बताये। 
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