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अजमेर जिला दर्शन | अजमेर जिला Rajasthan GK in Hindi | Ajmer District GK in Hindi

Ajmer District GK in Hindi : आज की इस पोस्ट में राजस्थान जिला दर्शन की श्रंखला में अजमेर जिला दर्शन को अच्छी तरह से पढ़ने की कोशिश की है। इसमें आप सभी के लिए Ajmer Zila Darshan, अजमेर का सामान्य परिचय, अजमेर के उपनाम, अजमेर का अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार, अजमेर का क्षेत्रफल, अजमेर के प्रमुख मेले और त्यौहार, अजमेर के प्रमुख मंदिर, अजमेर के प्रमुख दर्शनीय स्थल, अजमेर के पर्यटन स्थल, अजमेर जिले की खनिज संपदा, अजमेर जिले के अभयारण्य, अजमेर के सामान्य ज्ञान एवं इसके अलावा जितने भी अजमेर जिले से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य थे, उन सभी को शामिल कर पेश किया है।
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अजमेर जिला दर्शन

अजमेर का सामान्य परिचय -

देश के प्रथम पूर्ण साक्षर जिले के पुरस्कार से सम्मानित एवं सांप्रदायिक सद्भाव का संगम राजस्थान के अजमेर जिले की स्थापना चौहान शासक अजय राज ने 1113 में की थी। अजमेर जिले में अजयमेरू दुर्ग स्थित है जिसकी स्थापना अजय पाल ने सातवीं सदी में की थी। अजमेर के शासक पृथ्वीराज चौहान तृतीय के तराइन के द्वितीय युद्ध में मोहम्मद गोरी से पराजित होने से यहां पर मुस्लिम शासन की स्थापना हो गई थी। जिसके कारण अजमेर दिल्ली सल्तनत के अधीन हो गया था। अंग्रेजी शासन के काल में एजीजी का कार्यालय सबसे पहले अजमेर में स्थापित किया गया लेकिन बाद में इसे सिरोही के माउंट आबू में स्थानांतरित कर दिया गया। अकबर द्वारा 1558 ईस्वी में अजमेर को मुगल साम्राज्य में मिला दिया गया। इंग्लैंड के शासक जेम्स प्रथम के दूत सर टॉमस रो 1615 में 22 दिसंबर को अजमेर आए थे तथा उन्होंने अकबर के किले में जहांगीर से 10 जनवरी 1616 को मुलाकात की थी। औरंगजेब द्वारा उत्तराधिकार का अंतिम युद्ध दौराई नामक स्थान पर अजमेर में जीता गया। ब्रिटिश शासन के दौरान यह प्रांत सीधा ब्रिटिश शासन के अधीन केंद्रीय कमिश्नरी प्रांत था। यह क्षेत्र कई महान विभूतियों की कर्म स्थली रहा है। महान स्वतंत्रता सेनानी अर्जुन लाल सेठी जिन्होंने अंग्रेजी शासन से मुक्ति पाने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था तथा हरिभाऊ उपाध्याय इनकी कर्म स्थली भी अजमेर है। दानवीर सेठ दामोदर दास राठी जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में जूझ रहे क्रांतिकारियों को खुले हाथों से आर्थिक एवं वित्तीय सहायता प्रदान की थी वह भी अजमेर के ब्यावर के थे। महान तपस्वी स्वामी दयानंद सरस्वती जिन्होंने आर्य समाज की स्थापना की थी, उन्होंने अपना कुछ समय अजमेर में व्यतीत किया था तथा यहीं पर स्वामी दयानंद सरस्वती की समाधि भी स्थित है। मैग्सेसे पुरस्कार विजेता प्रसिद्ध समाज सेविका श्रीमती अरुणाराय ने सूचना के अधिकार कानून बनाने एवं जवाबदेही एवं पारदर्शी प्रशासन की स्थापना के अधिकार के लिए आंदोलन की शुरुआत 6 अप्रैल 1995 को अजमेर जिले के ब्यावर से ही की थी। अरुणा राय के प्रयासों से ही राजस्थान में 2000 में ही सूचना का अधिकार लागू कर दिया गया था। राजस्थान स्वतंत्रता के पश्चात 1956 तक 'सी श्रेणी' का राज्य रहा था। श्री हरीभाऊ उपाध्याय अजमेर के प्रथम एवं एकमात्र मुख्यमंत्री है। अजमेर जिले में नाग पहाड़ से लूणी नदी निकलती है तथा वहां से बहती हुई यह कच्छ के रण में जाकर गिरती है।
  • अजमेर जिले की अक्षांशीय स्थिति : 25 डिग्री 38 मिनट उत्तरी अक्षांश से 26 डिग्री 58 मिनट उत्तरी अक्षांश तक।
  • अजमेर जिले की देशांतरीय स्थिति : 73 डिग्री 54 मिनट पूर्वी देशांतर से 75 डिग्री 22 मिनट पूर्वी देशांतर तक।
  • अजमेर का शाब्दिक अर्थ होता है : एक ऐसा पर्वत जिसे जीता न जा सके।
  • अजमेर जिले का क्षेत्रफल : 8481 वर्ग किलोमीटर है। 
  • सन 1956 में अजमेर का राजस्थान में विलय हुआ था उस समय यह राजस्थान का 26 वां जिला बना था।
  • अजमेर जिले के प्रमुख उपनाम : भारत का मक्का-मदीना, राजस्थान का हृदय (केंद्रीय स्थिति), राजपूताने की कुंजी, राजस्थान का नाका, पृथ्वीपुर/अजयमेरु (प्राचीन नाम)

अजमेर जिले के मेले और त्यौहार -

  • पुष्कर मेला : पुष्कर मेला अजमेर में पुष्कर नामक स्थान पर कार्तिक शुक्ला एकादशी से पूर्णिमा तक भरता है। यहां पर पशु मेला भरता है। यह राजस्थान का सबसे बड़ा सांस्कृतिक मेला है। 
  • ख्वाजा साहब का उर्स - ख्वाजा साहब का उर्स भी राजस्थान के अजमेर में रज्जब माह की 1 से 6 तारीख तक भरता है। 
  • कल्पवृक्ष मेला - यह मेला अजमेर में मांगलियावास नामक स्थान पर श्रावण मास की हरियाली अमावस्या को भरता है। 

अजमेर जिले के प्रमुख मंदिर -

  • रंगनाथ जी का मंदिर - रंगनाथ जी का प्रसिद्ध मंदिर अजमेर जिले के पुष्कर में द्रविड़ शैली से निर्मित एक भव्य मंदिर है, जो मूलतः एक विष्णु मंदिर है।
  • सोनीजी की नसियां (लाल मंदिर) - इसका निर्माण 1864 ईस्वी में सेठ मूलचंद जी सोनी के द्वारा प्रारंभ किया गया था। यह मंदिर 1865 में बनकर तैयार हुआ था। इसमें प्रथम जैन तीर्थंकर आदिनाथ भगवान की मूर्ति दर्शनीय है। यह जैन संप्रदाय का एक प्रसिद्ध मंदिर है।
  • ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर - ब्रह्मा जी का प्रसिद्ध मंदिर अजमेर जिले के पुष्कर में स्थित है। यह एक विश्वविख्यात एकमात्र ब्रह्मा मंदिर है। इसका निर्माण 14वीं शताब्दी में हुआ था। यहां पर विधिवत एवं नियमित पूजा-अर्चना की जाती है।
  • सावित्री मंदिर - अजमेर जिले के पुष्कर में दक्षिण में रत्नागिरी पर्वत पर सावित्री का मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर में भादवा शुक्ला सप्तमी को एक विशाल मेला लगता है। यहीं पर सावित्री की पुत्री सरस्वती मां की प्रतिमा विराजमान है।
  • वराह मंदिर, पुष्कर - पुष्कर के वराह मंदिर का निर्माण चौहान शासक अर्णोराज ने 12 वीं शताब्दी में करवाया था। यह मंदिर विष्णु के वराह अवतार के लिए प्रसिद्ध है।
  • रामदेवरा थान - यह अजमेर जिले के खुंडियावास गांव में रामदेवजी का थान है। इसको मिनी रामदेवरा या दूसरा रामदेवरा भी कहा जाता है।
  • गायत्री मंदिर - अजमेर के पुष्कर के उत्तर में एक पहाड़ी पर प्रसिद्ध गायत्री मंदिर स्थित है।
  • काचरिया मंदिर एवं नवग्रह मंदिर - इस मंदिर में भगवान की सेवा निंबार्क पद्धति से की जाती है। अजमेर के किशनगढ़ में स्थित इस मंदिर में राधा-कृष्ण का स्वरूप विराजमान है। श्री कृष्ण जी का विग्रह अष्ट धातु निर्मित घनश्याम वर्ण का है। होली के दूसरे दिन इस मंदिर में डोलोत्सव मनाया जाता है।
  • सलेमाबाद - अजमेर में स्थित सलेमाबाद में निंबार्क संप्रदाय की प्रधान पीठ है।
  • आंतेड़ की छतरियां - अजमेर जिले के आंतेड़ में स्थित प्रसिद्ध छतरियां दिगंबर जैन संप्रदाय से संबंधित है।

तारागढ़ दुर्ग (गढ़ बिठली) -

  • तारागढ़ दुर्ग सर्वाधिक आंतरिक आक्रमण सहने वाला दुर्ग है। 
  • इस दुर्ग में शाहजहां के बेटे दाराशिकोह का जन्म हुआ था।
  • तारागढ़ दुर्ग के उपनाम - तारागढ़ दुर्ग, गढ बिठली दुर्ग, अजयमेरू दुर्ग, राजपूताना की कुंजी, राजस्थान का जिब्राल्टर (बिशप हेबर ने)
अजमेर जिले में स्थित इस गिरी दुर्ग का निर्माण चौहान शासक अजयपाल ने बिठली पहाड़ी पर सातवीं शताब्दी में करवाया था। इसलिए ही इस दुर्ग को गढ़ बिठली दुर्ग कहा जाता है। इस दुर्ग की तलहटी में 1113 ईस्वी में चौहान शासक अजय राज के द्वारा अजमेर शहर की स्थापना की गई। तारागढ़ दुर्ग के भीतर प्रसिद्ध मुस्लिम संत मीरा साहब की दरगाह भी स्थित है। मेवाड़ के राणा रायमल के युवराज पृथ्वीराज ने इस दुर्ग के कुछ भाग बनवाए थे तथा अपनी वीरांगना पत्नी तारा के नाम पर इस दुर्ग का नाम तारागढ़ रखा था। इस दुर्ग में स्थित मीरा साहब की दरगाह तारागढ़ के प्रथम गवर्नर मीर सैयद हुसैन खिंगसवार की है, जिन्होंने इस किले की रक्षा के लिए 1202 ईसवी में अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस दरगाह में घोड़े की मजार भी स्थित है। तारागढ़ की इस पहाड़ी के नीचे शीशाखान नामक एक प्राचीन गुफा स्थित है। शाहजहां के पुत्रों के बीच हुए उत्तराधिकार युद्ध के दौरान धौलपुर युद्ध में शाही सेना की पराजय के बाद दाराशिकोह ने तारागढ़ दुर्ग में आकर शरण ली थी। इस दुर्ग को राजस्थान का जिब्राल्टर भी कहा जाता है।

टॉडगढ़ दुर्ग, अजमेर -

  • अजमेर जिले में स्थित इस दुर्ग का निर्माण कर्नल जेम्स टॉड ने करवाया था।
  • पूर्व में इस स्थान को बोराडवाड़ा कहा जाता था।
  • इस दुर्ग में विजय सिंह पथिक और राव गोपाल सिंह खरवा को नजरबंद किया गया था।

मैग्नीज दुर्ग, अजमेर -

  • इस दुर्ग को  अकबर का दौलत खाना, अकबर का किला, शस्त्रागार, मैग्नीज दुर्ग भी कहा जाता है। 
  • इंग्लैंड के शासक जेम्स प्रथम के दूत टॉमरो ने अकबर के किले में 10 जनवरी 1616 को जहांगीर से मुलाकात की थी। 
  • मैग्नीज दुर्ग मुस्लिम पद्धति पर बना एकमात्र दुर्ग है।

केहरीगढ़ दुर्ग, अजमेर -

  • यह केहरीगढ़ दुर्ग गुंदोलाव तालाब के किनारे किशनगढ़ (अजमेर) में स्थित है। 
  • यह वर्तमान में एक हेरिटेज होटल के रूप में संचालित है। 
  • इस दुर्ग के आंतरिक भाग को 'जिवरक्खा महल' भी कहा जाता है।

अढ़ाई दिन का झोपड़ा, अजमेर -

  • अढाई दिन के झोपड़े का निर्माण चौहान शासक बीसलदेव (विग्रहराज चतुर्थ) द्वारा करवाया गया था। 
  • शुरू में यह एक संस्कृत पाठशाला के रूप में संचालित था। 
  • बाद में इस प्रांत पर मोहम्मद गोरी का अधिकार हो जाने से मोहम्मद गोरी के सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसे तोड़कर 1206 से 1210 ईस्वी के मध्य इसे अढाई दिन के झोपड़े में परिवर्तित कर दिया।
  • इसके बाद से ही इसे अढाई दिन के झोपड़े के रूप में जाना जाने लगा।

पृथ्वीराज स्मारक, अजमेर -

  • तारागढ़ दुर्ग की पहाड़ी की तलहटी में स्थित चौहान सम्राट पृथ्वीराज चौहान तृतीय का स्मारक 13 जनवरी 1996 को राष्ट्र को समर्पित किया गया था।

आनासागर झील, अजमेर -

  • आनासागर झील का निर्माण तुर्कों की सेना के संहार के बाद खून से रंगी धरती को साफ करने के लिए अर्णोराज ने 1137 विश्व में चंद्रा नदी के जल को रोककर करवाया था।
  • यह आनासागर झील अजमेर जिले के नाग पहाड़ व तारागढ़ के बीच स्थित है।
  • आनासागर झील के किनारे जहांगीर ने शाहीबाग/दौलत बाग का निर्माण करवाया था, जिसे वर्तमान में सुभाष उद्यान के नाम से भी जाना जाता है।
  • इस झील में बांडी नदी आकर गिरती है।
  • इसके किनारे शाहजहां ने संगमरमर की 5 बारहदरी का निर्माण करवाया था।

फॉयसागर झील, अजमेर -

  • फॉयसागर झील का निर्माण इंजीनियर फॉय के निर्देशन में अकाल राहत कार्य के तहत बांडी नदी पर बांध बनाकर करवाया गया था। 
  • अकाल राहत के लिए बनाई गई यह राजस्थान की दूसरी झील है। 
  • इसमें अधिक जल भरने पर इसका पानी आनासागर झील में जाता है।

मांगलियावास, अजमेर -

  • अजमेर के मांगलियावास में 800 वर्ष पुराना कल्पवृक्ष का जोड़ा स्थित है, इसके बारे में एक मान्यता प्रचलित है कि यहां हर मन्नत पूरी होती है।

जुबली क्लॉक टावर, अजमेर -

ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया की स्वर्ण जयंती की स्मृति में सन 1888 ईसवी में अजमेर रेलवे स्टेशन के सामने सफेद संगमरमर से एक कलात्मक जुबली क्लॉक टावर को निर्मित किया गया था। 

अब्दुल्ला खान का मकबरा -

इस मकबरे का निर्माण 1710 ईस्वी में अजमेर रेलवे स्टेशन से कुछ ही दूरी पर करवाया गया था।

पंचकुंड, अजमेर -

  • पुष्कर के पास स्थित पौराणिक स्थल जहां माना जाता है कि पांडव अज्ञातवास के दौरान रुके थे। 
  • पंचकुंड कृष्ण अभयारण्य के नाम से भी प्रसिद्ध है।
  • इसका अन्य नाम सुधा बाय है।

पुष्कर, अजमेर -

  • अजमेर में स्थित पुष्कर हिंदुओं का एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। 
  • यहां पर पवित्र पुष्कर झील भी स्थित है, जिसमें 52 घाट है।
  • पुष्कर में विश्व प्रसिद्ध एकमात्र ब्रह्मा जी का मंदिर स्थित है।
  • हिंदुओं के पांच प्रमुख तीर्थों में से पुष्कर को सबसे पवित्र तीर्थ माना जाता है।
  • पुष्कर को कोंकण तीर्थ, तीर्थराज, आदि तीर्थ आदि उपनामों से जाना जाता है।
  • पुष्कर में प्रतिवर्ष कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक का पुष्कर मेला भरता है, यह राजस्थान का सबसे बड़ा सांस्कृतिक मेला है।
  • यहां कार्तिक स्नान का बड़ा महत्व है।
  • पुष्कर झील के तट पर एक भव्य महल मानमहल स्थित है, जो आमेर के राजा मानसिंह द्वारा निर्मित है। 
  • संतोष बावला की छतरी भी पुष्कर (अजमेर) में स्थित है। 

ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह, अजमेर -

  • हजरत शेख उस्मान हारुनी के शिष्य ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह हर संप्रदाय के लोगों के लिए आस्था का स्थल है।
  • ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का जन्म 1142 ईस्वी में इरान में हुआ था।
  • यह पृथ्वीराज चौहान के काल में भारत आए थे तथा अजमेर को अपनी कार्यशैली बनाया था।

नसीराबाद छावनी में विद्रोह -

  • राजस्थान में सबसे पहले 1857 की क्रांति का विद्रोह नसीराबाद छावनी से 28 मई 1857 को शुरू हुआ था।
  • 28 मई 1857 को मेरठ से अजमेर, अजमेर से नसीराबाद आई 15वीं बंगाल नेटिव इन्फेंट्री टुकड़ी ने असंतुष्ट होकर विद्रोह कर लिया था। 
  • 30 वीं बंगाल नेटिव इन्फेंट्री टुकड़ी ने इसका साथ दिया था।
  • यहां के सैनिकों ने न्यूबरी नामक अधिकारी को मारकर 18 जून 1857 को दिल्ली पहुंचे।

अजमेर के महत्वपूर्ण प्रश्न -

  • देश की सबसे बड़ी संगमरमर मंडी एवं सबसे बड़ा हैंडलूम केंद्र किशनगढ (अजमेर) में स्थापित है।
  • आधुनिक व अंतरराष्ट्रीय स्तर का पावर लूम सिलोरा गांव अजमेर में स्थित है।
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा राज्य का पहला राष्ट्रीय बीज मसाला अनुसंधान केंद्र तबीजी (अजमेर) में स्थापित है।
  • देश का पहला सौर रेलवे स्टेशन अजमेर जिले में स्थित है।
  • देश का पहला जिला जिसमें डाकिया ग्रीन व्हीकल जो सोलर एनर्जी से चलेगा और डाक बांटेगा - अजमेर ।
  • राजस्थान में प्रथम ई लर्निंग व सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रीय संस्थान की स्थापना केकड़ी (अजमेर) में की गई।
  • राजस्थान में प्रथम नगर परिषद अजमेर में स्थापित है।
  • राजस्थान का पहला हाईटेक डाकघर पुष्कर (अजमेर) में स्थापित है।
  • महिला हॉकी एकेडमी अजमेर में स्थित है।
  • पावरलूम पार्क सिलोरा किशनगढ़ के पास अजमेर में स्थित है।
  • सिंथेटिक हॉकी मैदान अजमेर में स्थित है।
  • सहकारी समिति 1905 में भिनाय (अजमेर) में स्थापित की गई।
  • राजस्थान में 1857 की क्रांति की सबसे पहले शुरुआत नसीराबाद (अजमेर) से हुई थी।
  • राजस्थान की सबसे पुरानी डेयरी पदमा डेयरी 1975 में अजमेर में स्थापित की गई।
  • राजस्थान का पहला सहकारी उपभोक्ता भंडार अजमेर में है।
  • महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय की स्थापना 1987 ईस्वी में अजमेर में की गई थी, जिसे शुरू में अजमेर विश्वविद्यालय के नाम से स्थापित किया गया था 5 मई 1992 को वर्तमान नाम दिया गया। इसका कार्यक्षेत्र सबसे ज्यादा विस्तृत है।
  • केंद्रीय विश्वविद्यालय - बांदरसिंदरी (किशनगढ़, अजमेर)  में स्थित है।
  • केंद्र द्वारा अजमेर में गरीब नवाज विश्वविद्यालय एवं पृथ्वीराज चौहान केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाना प्रस्तावित है।
  • माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का मुख्यालय 1 अगस्त 1957 को अजमेर में खोला गया।
  • एकलव्य नाट्य संस्थान ब्यावर (अजमेर) में स्थित है।
  • राजस्थान लोक सेवा आयोग का मुख्यालय अजमेर में स्थित है।
  • राजस्थान राजस्व मंडल एवं मगरा लोक कला मंडल का मुख्यालय अजमेर में है।
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आज की इस पोस्ट में राजस्थान जिला दर्शन की श्रंखला में अजमेर जिला दर्शन को अच्छी तरह से पढ़ने की कोशिश की है। इसमें आप सभी के लिए अजमेर का सामान्य परिचय, अजमेर के उपनाम, अजमेर का अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार, अजमेर का क्षेत्रफल, अजमेर के प्रमुख मेले और त्यौहार, अजमेर के प्रमुख मंदिर, अजमेर के प्रमुख दर्शनीय स्थल, अजमेर के पर्यटन स्थल, अजमेर जिले की खनिज संपदा, अजमेर जिले के अभयारण्य, अजमेर के सामान्य ज्ञान एवं इसके अलावा जितने भी अजमेर जिले से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य थे, उन सभी को शामिल कर पेश किया है। उम्मीद है कि आप सभी को यह पोस्ट अच्छी लगी होगी।
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